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Thursday, 13 December 2018

Rajputana | Chohan Raj Vans Ki Sakhai | चौहानों राजवंश की शाखाएँ

चौहानों की खांपें (शाखाएँ)

चौहान राजवश की शाखाएँ

चौहानों राजवंश की 24 प्रमुख ओर 115 उपशाखाएं हैं जो
निम्नानूसार है

चौहानों की प्रमुख 24 शाखाएँ… 1 . शकम्भरी 2. नाडोला , 3. सोनिगरा 4. हाडा, 5. देवडा. 6. खीची, 7. निर्वाण 8. भदौरिया , 9. मेनपुरिंया या पूर्बिया, 10. मादरेचा, 11. भंवरेचा, 12. संकलेचा 13. राजकुमार, 14. बालेचा, 15. चचेसरा या चांचेरा . 16. चन्दुक्र , 17. 'रोसिया 18. तलेसरा 19. बंकट 20. थंधरिया या थंधेला 21. मोहिल या मल्ल या मालानी 22. पावेचा या पाविया 23. सूरा 24 वत्स्त गोत्री °|



चौहानों की 115 उपशाखाएं-

चौहान, चाहिल, मोहिल, जोड चौहान, पूर्बिया चौहान, सांभरिया चौहान, भदौरिया चौहान, रायजादे चौहान, चाहड़दे चौहान, नाडोलिया, सोनगरा चौलान बोड़ा, रूप सिहोत मानसिहोत, चांदण, हापड़, बाधोड़ भाला बाधोड़, रोहेचा बाधोड़, बालेखा, अबली सोनगरा चौहान, भाद्रेचा, नार चौहान, धुंधेर (धधेर) , सूरा ओर गोयलवाल, पावेचा, हाड़ा-धुग्धलोत्त, मोहणोत, हत्थावत, हलूपोता, लौहराज, हरपालोता, जैतावत, खिजूरीका, नवंरगपोता, थारूड़, लालावत, जाबदू, सांवत्तका, आवावत, चूड़ावत, उदावत, नरबदपोता, भोमोत, हमीरका, मोकलोत, अर्जुनोत अखेपोता, रामका, जसा, दूदा, रावमलोत, सुंरतानोत, हरदाउत, भोजावत, इन्द्रशालोत, बेरीशालोत, छत्रशालोत, मोहकमसिंहोत, मोहसिंहोत, दीपसिंहोत, बहादुरसिहोत, सरदारसिंहोत, माधाणी मोहनसिंहोत माधाणी, जुझारसिंहोत माधाणी, प्रेमसिहोत माधाणी, किशोरसिंहोत माद्याणी ।

 देवड़ा चौहानों की खापें-

बावनगरा, देवड़ा, मायावला देवड़ा, बड़गामा देवड़ा, बागड़ीया देवड़ा, बसी देवड़ा, कींतावत देवड़ा, गोसलावत देवड़ा, डूंगरोत देवड़ा-रामावत, सबरावत, सूरावत, मेरावत, अमरावत, भीमावत व अर्जुनोत, कूंपावत-मांडणोत, बाजावत, हरराजोत, गांगावत, बेरावत, मालणावत, शिवसिंहोत देवड़ा-लोटाणचा देवडा, बालदा देवड़ा, लखाणोंत देवड़ा, लखावत देवडा पृथ्वीराजोत, सामीदासोत, प्रतापसिंहोत, सांमतसिंहोत, बालोत देवडा, हाथियोत देवड़ा, चीबा देवड़ा, आभा देवड़ा, सांचोरा चौहान-रामसिंहोत्त, भोजराजोत्त, पृथ्वीराजोत, तेजमालोत्त, इंसरदासोत, वेणीदासोत, नरहरदासोत सेसमलोत, सादूलोत कांपलिया चौहान, निर्वाण बागडीया चौहान बालीसा (बालेचा) चौहान, बालोत चौहान ।

चौहानों के गोत्र प्रवरादि 


वंश  -  अग्रिवंश

वेद   -  सामवेद

गोत्र   -  वत्स

वृक्ष    -  आशापाल

नदी    -   सरस्वती

पोलपात - दसोंदी

 इष्टदेव    - अचलेश्वर महादेव

कुलदेवी  - आशापुरां

 नगारा   -   रणजीत

निशान   -  पीला

झण्डा    -  सूरज, चांद, कटारी

शाखा    -   कौथुनी

पुरोहित  -  सनादय (चंदोरिया)

 भाट   -   राजोरा

धूणी     -   सांभर

भेरू      -   कालाभैरव

गढ़      -   रणथम्भोर

शुरु     -   वशिष्ट

तीर्थ    -   भृगु क्षेत्र

पक्षी   -   कपोत

ऋषि    -   शांडिल्य

नोबत   -   कालिका

 पितृ      -   लोटजी

प्रणाम   -    जयआशापुरी

विरद   -    समरीनरेश
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Thursday, 6 December 2018

राजपुत भाटी वंश की प्रमुख खांपे ( शाखाएँ )

भाटी वंश की प्रमुख रियासत जैसलमेर के राज्य चिह्न में एक
ढाल, खंजन पक्षी, ढाल के दोनों तरफ हिरण, बीच में बूर्जे और' एक बलिष्ट पुरूष की भुजा में एक तरफ से मुडा हूआ भाला अंकिन है । नीचे छत्राला यादव पति वाक्य अंकित है जेसलमेर का झंडा भगवा रंग का है और बीच मे राज्य चिह्न अंकितहै ।


भाटियों के गोत्र प्रवरादि

वश - चंद्रवंश

 कुल परम्पण - यदू

कुलदेवता - लक्ष्मीनाथजी

कुलदेवी -  सागिया

इष्टदेव - श्रीकृष्ण

वेद - यजुर्वेद

गोत्र - अत्रि

छत्र - मेघाडम्बर

ध्वज भगवा पीला रंण

ढोल - भंवर

नक्कारा - अग्नजोत (अणजीत)

गूरू -  रतननाथ

पुरोहित - पुष्करणा ब्राहाण

 पोलपात - रतनू चारण

नदी - यमुना

वृक्ष - पीपल और कदम्ब

 राग -  मांड

माला - वैजयन्ती

'विरुद - उत्तर भड़ किवाड़ भाटी

अभिवादन - जयश्री कृष्ण


भाटियो की खांपे ( शाखाएँ )
 । . भाटी
2. भाटी यादव-अभोरिया भाटीं, गोगली भाटी, सिंघवार भाटी,
लडूवा भाटी, चहल भाटी, खंगार भाटी, धूकड़ भाटी, बुद्ध भाटी, धाराधर भाटी, कूलरिया भाटी, लोहा भाटी, उतैराव भाटी, चनहड़ भाटी, खापरिया भाटी, थहीम भाटी, जेतुग भाटी, घोटक भाटी, चेदू भाटी, गाहाड़ भाटी, पोहड़ भाटी, छेना भाटी, अटैरण भाटीं, लहुवा भाटी, लपोड़ भाटी, पाहू भाटी, इणधा भाटी, मूलपसाव, धोवाभाटी, पावसणा भाटी, 'अबोहरिया भाटी, राहड़ भाटी, हटा भाटी, भीया भाटी, बानर भाटी, पलासिया भाटी, मोकल भाटी, महाजाल भाटी, जसोड़ भाटी, जयचन्द भाटी, सिहड़ भाटी, अड़कमल भाटी. जैतसिंहोत भाटी, चरड़ा भाटी, लूणराव भाटी, कान्हड़ भाटी, ऊनड़ भाटी, सता भाटी, कीता भाटी, गोगादे भाटी, हमीर भाटी, हम्मीरोत भाटी, अर्जुनोत्त भाटी, केहरोत भाटी, सोम भाटी, रूपसिंहोत भाटी, मेहजलं भाटी, जेसा भाटी, सांवतसी भाटी, एपिया भाटी, तेजसिंहोन भाटी, साधर भाटी, गोपालदे भाटी, लाखण (लखमणा) भाटी, राजधर भाटी, परबत भाटी. हक्का भाटी, कुम्भा भाटी, केलायचा भाटी, भेसडेचा भाटी, सातलोत भाटी, मदा भाटी, ठाकृत्रसिंहोत भाटी, देवीदासोत भाटी, दूदा भाटी, जेत्तसिंहोत भाटी, बेरीशालोत भाटी, ल्लूणकणोंत्तभाटी, दीदा भाटी, मालदेवोत , खेत्तसिंहोत्त भाटी, नारायणदायोन भाटी, सगतहोत भाटी, -आखेराजोत भाटी, कानोत, पृथ्वीराजोत भाटी, उदयसिंहोत्त भाटी, दूदावत भाटी, तेजमालोत भाटी, गिरधारीदासोत्त भाटी, वीरमदेवोत्त माटी, रावलोत माटी, रावलोत देरावरिया भाटी, किलण भाटी, बिक्रमाजित केलण भाटी, शेखसरिया भाटी, हरभम भाटी, नेतावत भाटी, किशनावत भाटी, खीया भाटी-जेतावत, करणोत, धनराजोत्त माटी, बरसिह भाटी-वाला, सातल दूर्जनसालोन भाटी, पूणलिया भाटीं, बिदा भाटी, हमीर भाटी, शूरसेन यादव-बागड़िया, बनाफर छोकर.  की निम्न खापें

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क्षत्रियो के कुल 36 वंश नियत हुए जिनमें 16 सूर्यवंशी, 16 चन्द्रवंशी

अलग-अलग जातियाँ काइम होने के दर्मियानी समय में क्षत्रियो के कुल 36 वंश नियत हुए जिनमें 16 सूर्यवंशी, 16 चन्द्रवंशी
और 4 अग्निवंशी थे। इन छत्तीस वंशों में से बहुत से तो नष्ट हो गये और कई बंशों की प्रतिशाखाओं को लोगों ने जुदा वंश समझन लिया। इस गड़बड़ से छत्तीस वंशों की गणना का क्रम भंग हो गया। कुमारपालचरित्र काव्य में 36 वंशों की गणना लिखी है


छत्तीसराजवंशों की सूची
1. गूहील (गहलोत), 2, प्रमार (पंवार), 3. चोहान, 4.
चालुक्य ( सोलंकी),5. राठौड़, 6. तुनूप्रर7बडगूजर8. प्रतिहार
(परिहार), 9. झाला, 10. यादव,11  कछवाह12गोड़13.
सेंगर, 14. बल्ला, 15. खुखार (खाखार), 16. चावड़ा, 17. दहिया,18. दाहिम, 19. वैश्य (वैस) 20. घेरवार (गहरवाल), 21. निकुम्प (निकुंभ), 22. देवत23. जोहिया, 24. सिकरवार,25. डाबरी (डाभीया), 26. डोड, 27. मोरी (मौर्य), 28. मोकारा29. अभिया (अभीरा), 30, काले हीरक (काल चोदक हृदयवंशी), 31. अग्नि पाल, 32. आप्त वारिया (सरजा). 33 . कुल, 34. मनुटवाल (मनतवाल) 35. माल्लिया 36. चाहिल।





सूर्यवंशी क्षत्रीय
राठोड़, कछवाहा ,गुहिलोत, बडगूजर, सिकरवाल, निकूम्भ, श्रीनेत, नेवतनी, कण्डवार, निशान, निमी वंश, नन्द वंश, बैस, विसेन, गोतम,गोड़, दिक्षित, काकन, गोहील, सिंधेल, गर्गवंशी, लोहतमी, धाकर, उदमतिया, काकतिय, निमूड़ी, किनवार, चन्दोसिया, रावत, पूण्डीर, भोसले, बल्ला

चन्द्रवशी क्षत्रिय
सोमवश, यादव, तंवर, हेहय, कलचुरी, कोशिक, सैगर, चन्देल, गहरवाल, बेरूआर, जानवार, झाला, बिलादरिया, भाटी, बनाफर, तिलोरा, भारद्वज, स्वाति, सरनिहा, बुन्देला

अग्निवंशी क्षत्रिय
परमार, पंवार, सांखला, भायल, सोढ़ा, सोलंकी, पड़ीयार, इन्दा, चोहान, हाडा, खीची, देवड़ा,उज्जेनिया पंवार, दोगाई, चावड़ा, केलवाड़, जेठवा, हूल, दहिया,

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